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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण
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श्लोक 62-63h
श्लोक
7.198.62-63h
किं नु शक्यं मया कर्तुं कार्यं यदिदमुद्यतम्॥ ६२॥
सुमहत् पाण्डुपुत्राणामायान्त्येते हि कौरवा:।
अनुवाद
"लेकिन इस समय मैं क्या कर सकता हूँ? यह पांडवों का एक और महान कार्य है। ये कौरव आगे बढ़ रहे हैं।"
‘But what can I do at this time? This is another great task of the Pandavas. These Kauravas are advancing. 62 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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