Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.198.57-59h: हे शनिप्रवर, हे समस्त धर्मों के ज्ञाता! इस प्रकार मित्रता-धर्म का विचार करके आप धृष्टद्युम्न के प्रति अपने क्रोध को रोककर शान्त हो जाएँ। आप धृष्टद्युम्न को क्षमा करें और धृष्टद्युम्न आपको क्षमा करें। हम तो केवल क्षमा की प्रार्थना कर रहे हैं; शान्ति से बढ़कर और क्या हो सकता है?॥57-58 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे शनिप्रवर, हे समस्त धर्मों के ज्ञाता! इस प्रकार मित्रता-धर्म का विचार करके आप धृष्टद्युम्न के प्रति अपने क्रोध को रोककर शान्त हो जाएँ। आप धृष्टद्युम्न को क्षमा करें और धृष्टद्युम्न आपको क्षमा करें। हम तो केवल क्षमा की प्रार्थना कर रहे हैं; शान्ति से बढ़कर और क्या हो सकता है?॥57-58 1/2॥
O Shanipravar, the knower of all Dharmas! Having thus considered the Dharma of friendship, you should restrain your anger towards Dhrishtadyumna and become calm. You should forgive Dhrishtadyumna and Dhrishtadyumna should forgive you. We are only praying for forgiveness; what can be better than peace?'॥ 57-58 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥