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mahabharat 7.198.52-53h: हे प्रजानाथ! यह सुनकर सहदेव भी तुरन्त रथ से उतर पड़े और महाबली भीमसेन द्वारा पकड़े हुए सात्यकि से मधुर वाणी में बोले - ॥ 52 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  7.198.52-53h 
अवरुह्य रथात् तूर्णं ध्रियमाणं बलीयसा॥ ५२॥
उवाच श्लक्ष्णया वाचा सहदेवो विशाम्पते।
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! यह सुनकर सहदेव भी तुरन्त रथ से उतर पड़े और महाबली भीमसेन द्वारा पकड़े हुए सात्यकि से मधुर वाणी में बोले - ॥ 52 1/2॥
 
O Prajanath! At this Sahadev also immediately got down from the chariot and spoke in a sweet voice to Satyaki who was caught by the mighty Bhimasena -॥ 52 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)