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mahabharat 7.198.5-7h: संजय ने कहा - प्रजानाथ! द्रुपद के क्रूर पुत्र के वचन सुनकर वहाँ बैठे हुए सभी राजा मौन हो गए। केवल अर्जुन ने टेढ़ी दृष्टि से उसकी ओर देखा और आँसू बहाते हुए गहरी साँस ली और केवल इतना कहा - 'तुम्हें धिक्कार है! तुम्हें धिक्कार है!!'॥5-6 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण  »  श्लोक 5-7h
 
 
श्लोक  7.198.5-7h 
संजय उवाच
श्रुत्वा द्रुपदपुत्रस्य ता वाच: क्रूरकर्मण:॥ ५॥
तूष्णीं बभूवू राजान: सर्व एव विशाम्पते।
अर्जुनस्तु कटाक्षेण जिह्मं विप्रेक्ष्य पार्षतम्॥ ६॥
सबाष्पमतिनि:श्वस्य धिग् धिगित्येव चाब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा - प्रजानाथ! द्रुपद के क्रूर पुत्र के वचन सुनकर वहाँ बैठे हुए सभी राजा मौन हो गए। केवल अर्जुन ने टेढ़ी दृष्टि से उसकी ओर देखा और आँसू बहाते हुए गहरी साँस ली और केवल इतना कहा - 'तुम्हें धिक्कार है! तुम्हें धिक्कार है!!'॥5-6 1/2॥
 
Sanjaya said - Prajanath! On hearing the words of the cruel son of Drupada, all the kings sitting there remained silent. Only Arjuna looked at him with a crooked eye and shedding tears and sighed deeply and said only this - 'Shame on you! Shame on you!!'॥ 5-6 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)