Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.198.48-50h: जब यमराज सत्याक्ष, जो अत्यन्त बलवान, युद्ध न करने वाले और अत्यन्त क्रोध में भरे हुए थे, सहसा कालरूपी धृष्टद्युम्न की ओर बढ़े, तब भगवान श्रीकृष्ण की आज्ञा पाकर महाबली भीमसेन ने तत्काल रथ से कूदकर उन्हें दोनों हाथों से रोक लिया। 48-49 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब यमराज सत्याक्ष, जो अत्यन्त बलवान, युद्ध न करने वाले और अत्यन्त क्रोध में भरे हुए थे, सहसा कालरूपी धृष्टद्युम्न की ओर बढ़े, तब भगवान श्रीकृष्ण की आज्ञा पाकर महाबली भीमसेन ने तत्काल रथ से कूदकर उन्हें दोनों हाथों से रोक लिया। 48-49 1/2॥
When Satyaksha, the king of Yama, who was very powerful, non-fighting and filled with extreme anger, suddenly moved towards Dhrishtadyumna in the form of Kaal, then on the orders of Lord Shri Krishna, the mighty Bhimsen immediately jumped from the chariot and stopped him with both his hands. 48-49 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥