श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  7.198.44-45h 
दुर्ज्ञेय: स परो धर्मस्तथाधर्मश्च दुर्विद:॥ ४४॥
युध्यस्व कौरवै: सार्धं मा गा पितृनिवेशनम्।
 
 
अनुवाद
उत्तम धर्म का स्वरूप जानना अत्यंत कठिन है। अधर्म क्या है? यह समझना भी आसान नहीं है। अब पहले की तरह कौरवों से युद्ध करो। मुझसे विवाद करके पितृलोक जाने की तैयारी मत करो। 44 1/2।
 
It is very difficult to know the nature of the best Dharma. What is Adharma? It is not easy to understand this either. Now fight with the Kauravas as before. Do not prepare to go to Pitriloka by arguing with me. 44 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)