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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण
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श्लोक 41-42h
श्लोक
7.198.41-42h
अधर्मेणापकृष्टश्च मद्रराज: परेरित:॥ ४१॥
अधर्मेण तथा बाल: सौभद्रो विनिपातित:।
अनुवाद
शत्रुओं ने छलपूर्वक मद्रराज शल्य को अपने पक्ष में कर लिया और अधर्मपूर्वक सुभद्रापुत्र अभिमन्यु को भी मार डाला ॥41 1/2॥
The enemies deceitfully won over Madra king Shalya to their side and also killed Subhadra's son Abhimanyu through unrighteousness. ॥ 41 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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