श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  7.198.36-37h 
जोषमास्स्व न मां भूयो वक्तुमर्हस्यत: परम्॥ ३६॥
अधरोत्तरमेतद्धि यन्मां त्वं वक्तुमर्हसि।
 
 
अनुवाद
चुपचाप बैठ जाओ, तुम्हें ऐसी बातें दोबारा नहीं कहनी चाहिए। तुम मुझसे जो कुछ कहना चाहते हो, वह तुम्हारी बड़ी नीचता है। 36 1/2।
 
Sit quietly; you should not say such things again. Whatever you want to say to me is a great meanness on your part. 36 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)