Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.198.35-36h: हे वृष्णिवंशी! ऐसे पाप करने वाले और पाप कर्मों के भण्डार तुम ही हो, मैं नहीं। अतः ऐसे वचन फिर मत कहना। 35 1/2 | mahabharat अध्याय 7.198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कर्ता त्वं कर्मणो ह्यस्य नाहं वृष्णिकुलाधम॥ ३५॥
पापानां च त्वमावास: कर्मणां मा पुनर्वद।
अनुवाद
हे वृष्णिवंशी! ऐसे पाप करने वाले और पाप कर्मों के भण्डार तुम ही हो, मैं नहीं। अतः ऐसे वचन फिर मत कहना। 35 1/2
Disgrace of the Vrishni clan! You are the one who commits such sins and is the repository of sinful deeds, not me. So do not utter such words again. 35 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥