श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  7.198.32-33h 
त्वया पुनरनार्येण पूर्वं पार्थेन निर्जित:॥ ३२॥
यदा तदा हत: शूर: सौमदत्ति: प्रतापवान्।
 
 
अनुवाद
जब अर्जुन ने वीर योद्धा सोमदत्तकुमार भूरिश्रवा को पहले ही पराजित कर दिया था, तब तुमने उसे मार डाला। तुम कितने नीच हो?॥32 1/2॥
 
When Arjun had already defeated the valiant warrior Somadattakumar Bhurishrava, you killed him. How mean are you?॥ 32 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)