श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  7.198.29-30h 
गाहमानो मया द्रोणो दिव्येनास्त्रेण संयुगे॥ २९॥
विसृष्टशस्त्रो निहत: किं तत्र क्रूर दुष्कृतम्।
 
 
अनुवाद
हे क्रूर! मैंने तो युद्धभूमि में दिव्यास्त्रों से द्रोणाचार्य को कष्ट दिया था। फिर उन्होंने अपने शस्त्र रख दिए और मारे गए, तो इसमें मैंने कौन-सा पाप किया?
 
O cruel one! I had already made Dronacharya suffer with divine weapons in the battlefield. Then he laid down his weapons and was killed, so what sin did I commit in that?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)