Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.198.28-29h: भूरिश्रवा की भुजा कटी हुई थी। वह मृत्युपर्यन्त उपवास का व्रत लेकर चुपचाप बैठा था। उस अवस्था में, सबके विरोध के बावजूद, तुमने उसे मार डाला। इससे बड़ा पाप और क्या हो सकता है?॥28 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
य: स भूरिश्रवाश्छिन्नभुज: प्रायगतस्त्वया॥ २८॥
वार्यमाणेन हि हतस्तत: पापतरं नु किम्।
अनुवाद
भूरिश्रवा की भुजा कटी हुई थी। वह मृत्युपर्यन्त उपवास का व्रत लेकर चुपचाप बैठा था। उस अवस्था में, सबके विरोध के बावजूद, तुमने उसे मार डाला। इससे बड़ा पाप और क्या हो सकता है?॥28 1/2॥
Bhurishrava's arm had been chopped off. He was sitting quietly, having taken the vow of fasting till death. In that condition, despite everyone's objection, you killed him. What could be a greater sin than this?॥28 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥