Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.198.27-28h: तू स्वयं दुष्ट है, नीच है और पापमय विचारों वाला है। तू निन्दनीय है, क्योंकि तू सिर से पाँव तक पाप में डूबा हुआ है, फिर भी तू दूसरों की निन्दा करना चाहता है। ॥27 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स त्वं क्षुद्रसमाचारो नीचात्मा पापनिश्चय:॥ २७॥
आकेशाग्रान्नखाग्राच्च वक्तव्यो वक्तुमिच्छसि।
अनुवाद
तू स्वयं दुष्ट है, नीच है और पापमय विचारों वाला है। तू निन्दनीय है, क्योंकि तू सिर से पाँव तक पाप में डूबा हुआ है, फिर भी तू दूसरों की निन्दा करना चाहता है। ॥27 1/2॥
You yourself are wicked, mean and have sinful thoughts. You are condemnable because you are immersed in sin from head to toe, yet you want to criticize others. ॥ 27 1/2 ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥