श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.198.25-26h 
धृष्टद्युम्न उवाच
श्रूयते श्रूयते चेति क्षम्यते चेति माधव॥ २५॥
सदानार्योऽशुभ: साधुं पुरुषं क्षेप्तुमिच्छति।
 
 
अनुवाद
धृष्टद्युम्न बोले - माधव! मैं आपकी बात सुन रहा हूँ और इसके लिए आपको क्षमा भी करता हूँ। दुष्ट और अधर्मी लोग सदैव संतों पर ऐसे आरोप लगाने की इच्छा रखते हैं।
 
Dhrishtadyumna said - Madhava! I am listening to what you are saying and I am also forgiving you for this. Evil and unrighteous people always wish to make such allegations against the saints. 25 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)