श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  7.198.23-24h 
तिष्ठ तिष्ठ सहस्वैकं गदापातमिमं मम॥ २३॥
तव चापि सहिष्येऽहं गदापाताननेकश:।
 
 
अनुवाद
‘खड़े हो जाओ, खड़े हो जाओ’, मेरी गदा का यह एक वार सहन कर लो, फिर मैं भी तुम्हारी गदा के अनेक वार सहन कर लूँगा।॥23 1/2॥
 
‘Stand up, stand up’, bear this one blow of my mace, then I will bear many blows of your mace too.॥ 23 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)