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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  7.198.19-20h 
पञ्चालाश्चलिता धर्मात् क्षुद्रा मित्रगुरुद्रुह:॥ १९॥
त्वां प्राप्य सहसोदर्यं धिक्कृतं सर्वसाधुभि:।
 
 
अनुवाद
तुम और तुम्हारा भाई दोनों ही समस्त संतों की निंदा के पात्र हैं। तुम दोनों को पाकर समस्त पांचाल भ्रष्ट, नीच, मित्र-द्रोही और गुरु-द्रोही हो गए हैं।
 
‘You and your brother both deserve the condemnation of all the saints. After getting you both, all the Panchalas have become corrupt, mean, traitors to friends and traitors to their Guru.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)