श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  7.198.16-17h 
उक्तवांश्चापि यत् पार्थे भीष्मं प्रति नरर्षभम्॥ १६॥
तथान्तो विहितस्तेन स्वयमेव महात्मना।
 
 
अनुवाद
तुमने जो कुन्तीपुत्र अर्जुन पर पुरुषोत्तम भीष्म की हत्या का आरोप लगाया है, वह भी व्यर्थ है; क्योंकि स्वयं भीष्म ने अपनी मृत्यु इसी प्रकार निश्चित कर रखी थी ॥16 1/2॥
 
The accusation that you have made on Arjuna, the son of Kunti, for the murder of the greatest of men, Bhishma, is also futile; because the great Bhishma himself had ordained that his own death would be in that manner. ॥ 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)