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mahabharat 7.198.12-13h: पापकर्म करके तथा इस प्रकार सार्वजनिक रूप से अपनी बड़ाई करके तुम समस्त कुन्तीपुत्रों तथा अन्धक और वृष्णि वंश के यादवों द्वारा निन्दा के पात्र हो गए हो॥ 12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  7.198.12-13h 
वाच्यस्त्वमसि पार्थैश्च सर्वैश्चान्धकवृष्णिभि:॥ १२॥
यत् कर्म कलुषं कृत्वा श्लाघसे जनसंसदि।
 
 
अनुवाद
पापकर्म करके तथा इस प्रकार सार्वजनिक रूप से अपनी बड़ाई करके तुम समस्त कुन्तीपुत्रों तथा अन्धक और वृष्णि वंश के यादवों द्वारा निन्दा के पात्र हो गए हो॥ 12 1/2॥
 
By committing sinful acts and thus extolling yourself in public, you have become worthy of condemnation by all the sons of Kunti, and the Yadavas of the Andhaka and Vrishni clans.॥ 12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)