श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 197: भीमसेनके वीरोचित उद्‍गार और धृष्टद्युम्नके द्वारा अपने कृत्यका समर्थन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.197.43 
कुलक्रमागतं वैरं ममाचार्येण विश्रुतम्।
तथा जानात्ययं लोको न यूयं पाण्डुनन्दना:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य के साथ मेरा पारिवारिक वैर है, जो सर्वविदित है। सारा संसार उसे जानता है; क्या तुम पाण्डव उसे नहीं जानते?॥ 43॥
 
I have a family-based rivalry with Dronacharya, which is very well known. The whole world knows about it; don't you Pandavas know about it?॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)