श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 197: भीमसेनके वीरोचित उद्‍गार और धृष्टद्युम्नके द्वारा अपने कृत्यका समर्थन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.197.42 
क्षमामि ते सर्वमेव वाग्व्यतिक्रममर्जुन।
द्रौपद्या द्रौपदेयानां कृते नान्येन हेतुना॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
हे अर्जुन! मैं तुम्हारे सब कठोर और नकारात्मक वचनों को केवल अपनी बहिन द्रौपदी और उसके पुत्रों के लिए ही सहन कर रहा हूँ, अन्य किसी कारण से नहीं ॥42॥
 
Arjuna, I tolerate all your harsh and negative words only for the sake of my sister Draupadi and her sons and for no other reason. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)