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mahabharat 7.197.41: पार्थ! जैसे हाथी सम्बन्ध स्थापित होने पर अपने शरीर को सीढ़ी बनाकर लोगों को चढ़ाने के लिए बैठ जाता है, वैसे ही मैं भी तुम्हारे सम्बन्ध के कारण झुकता हूँ; इसलिए तुम्हें मुझसे ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 7.197: भीमसेनके वीरोचित उद्‍गार और धृष्टद्युम्नके द्वारा अपने कृत्यका समर्थन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 197: भीमसेनके वीरोचित उद्‍गार और धृष्टद्युम्नके द्वारा अपने कृत्यका समर्थन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.197.41 
सम्बन्धावनतं पार्थ न मां त्वं वक्तुमर्हसि।
स्वगात्रकृतसोपानं निषण्णमिव दन्तिनम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! जैसे हाथी सम्बन्ध स्थापित होने पर अपने शरीर को सीढ़ी बनाकर लोगों को चढ़ाने के लिए बैठ जाता है, वैसे ही मैं भी तुम्हारे सम्बन्ध के कारण झुकता हूँ; इसलिए तुम्हें मुझसे ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए॥ 41॥
 
Partha! Just as an elephant, after establishing a relationship, makes a ladder of its own body and sits down to make people climb on it, similarly, I too bow down due to my relationship with you; therefore, you should not say such things to me.॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)