श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 197: भीमसेनके वीरोचित उद्‍गार और धृष्टद्युम्नके द्वारा अपने कृत्यका समर्थन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  7.197.40 
पितामहं रणे हत्वा मन्यसे धर्ममात्मन:।
मया शत्रौ हते कस्मात् पापे धर्मं न मन्यसे॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में अपने पितामह को मारकर भी तुम अपने लिए धर्म समझते हो, किन्तु जब मैं पापी शत्रु को मारता हूँ, तब भी तुम इस कार्य को धर्म नहीं समझते; इसका क्या कारण है?
 
You consider it a Dharma for yourself even after killing your grandfather in the war, but even when I kill a sinful enemy, you do not consider this act as Dharma; what is the reason for this?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)