Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.197.37: जैसे तुमने जयद्रथ का सिर काट कर फेंक दिया था, उसी प्रकार मेरी यह भूल कि मैंने द्रोणाचार्य का सिर निषादों के स्थान पर नहीं फेंका, मेरे हृदय में चुभ रही है। | mahabharat अध्याय 7.197: भीमसेनके वीरोचित उद्गार और धृष्टद्युम्नके द्वारा अपने कृत्यका समर्थन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे तुमने जयद्रथ का सिर काट कर फेंक दिया था, उसी प्रकार मेरी यह भूल कि मैंने द्रोणाचार्य का सिर निषादों के स्थान पर नहीं फेंका, मेरे हृदय में चुभ रही है।
Just like you threw away the head of Jayadratha, similarly the mistake of mine that I did not throw the head of Dronacharya in the place of Nishads is piercing my vital spots.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥