श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 197: भीमसेनके वीरोचित उद्‍गार और धृष्टद्युम्नके द्वारा अपने कृत्यका समर्थन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.197.35 
कालानलसमं पार्थ ज्वलनार्कविषोपमम्।
भीमं द्रोणशिरश्छिन्नं न प्रशंससि मे कथम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! द्रोण का सिर प्रलयकाल की अग्नि के समान भयंकर तथा पार्थिव अग्नि, सूर्य और विष के समान दुःखदायी था, अतः मैंने उसे काट डाला है। इसके लिए तुम मेरी स्तुति क्यों नहीं करते?॥ 35॥
 
Partha! Drona's head was as dreadful as the fire of doomsday and was as painful as the earthly fire, the sun and poison, so I have cut it off. Why don't you praise me for this?॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)