श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 197: भीमसेनके वीरोचित उद्‍गार और धृष्टद्युम्नके द्वारा अपने कृत्यका समर्थन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.197.31 
यस्य कार्यमकार्यं वा युध्यत: स्यात् समं रणे।
तं कथं ब्राह्मणं ब्रूया: क्षत्रियं वा धनंजय॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
धनंजय! युद्धभूमि में युद्ध करते समय जिसके कर्तव्य और अकर्तव्य एक ही हैं, उसे तुम ब्राह्मण या क्षत्रिय कैसे कह सकते हो?॥31॥
 
Dhananjaya! How can you call a person, for whom duty and non-duty are the same while fighting on the battlefield, a Brahmin or a Kshatriya?॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)