Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.197.3: पार्थ! जैसे वनवासी ऋषि या ब्राह्मण कठोर व्रत का पालन करते हुए तथा किसी भी प्राणी को दण्ड न देते हुए धर्म का उपदेश करते हैं, वैसे ही आप भी धर्म के अनुसार ही बोल रहे हैं॥3॥ | mahabharat अध्याय 7.197: भीमसेनके वीरोचित उद्गार और धृष्टद्युम्नके द्वारा अपने कृत्यका समर्थन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पार्थ! जैसे वनवासी ऋषि या ब्राह्मण कठोर व्रत का पालन करते हुए तथा किसी भी प्राणी को दण्ड न देते हुए धर्म का उपदेश करते हैं, वैसे ही आप भी धर्म के अनुसार ही बोल रहे हैं॥3॥
Partha! Just as a forest dwelling sage or a Brahmin who observes a strict vow and does not punish any living creature preaches Dharma, you too are speaking in accordance with Dharma.॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥