श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 197: भीमसेनके वीरोचित उद्‍गार और धृष्टद्युम्नके द्वारा अपने कृत्यका समर्थन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.197.28 
तस्मिंस्तथा मया शस्ते यदि द्रौणायनी रुषा।
कुरुते भैरवं नादं तत्र किं मम हीयते॥ २८॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं इसी अवस्था में द्रोणाचार्य को मार डालूँ और द्रोणपुत्र क्रोध में दहाड़ें, तो इससे मेरी क्या हानि होगी? ॥28॥
 
If I kill Dronacharya in this state and Drona's son roars in anger, what harm will it do me? ॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)