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mahabharat 7.197.2: भरतश्रेष्ठ! तब महाबाहु भीमसेन को क्रोध आ गया। उन्होंने कुन्तीकुमार अर्जुन को फटकारते हुए कहाः॥2॥   |   mahabharat अध्याय 7.197: भीमसेनके वीरोचित उद्‍गार और धृष्टद्युम्नके द्वारा अपने कृत्यका समर्थन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 197: भीमसेनके वीरोचित उद्‍गार और धृष्टद्युम्नके द्वारा अपने कृत्यका समर्थन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.197.2 
तत: क्रुद्धो महाबाहुर्भीमसेनोऽभ्यभाषत।
कुत्सयन्निव कौन्तेयमर्जुनं भरतर्षभ॥ २॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! तब महाबाहु भीमसेन को क्रोध आ गया। उन्होंने कुन्तीकुमार अर्जुन को फटकारते हुए कहाः॥2॥
 
Bharatshrestha! Then the mighty-armed Bhimsen got angry. Rebuking Kuntikumar Arjun, he said: 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)