श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 197: भीमसेनके वीरोचित उद्‍गार और धृष्टद्युम्नके द्वारा अपने कृत्यका समर्थन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.197.16 
अधर्ममेनं विपुलं धार्मिक: सन् न बुद्‍ध्यसे।
यत् त्वमात्मानमस्मांश्च प्रशस्यान् न प्रशंससि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि आप और मैं प्रशंसा के योग्य हैं, तथापि अपनी और मेरी प्रशंसा न करना आपका महान पाप है, और आप धार्मिक होते हुए भी इस पाप को नहीं समझते॥16॥
 
Although you and I are worthy of praise, yet it is a great sin on your part not to praise yourself and I, and you, being religious, do not understand this sin.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)