श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 197: भीमसेनके वीरोचित उद्‍गार और धृष्टद्युम्नके द्वारा अपने कृत्यका समर्थन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.197.11 
एतान्यमर्षस्थानानि मर्षितानि मयानघ।
क्षत्रधर्मप्रसक्तेन सर्वमेतदनुष्ठितम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अनघ! ये सब अन्याय क्रोध के स्थान थे - असह्य थे, किन्तु मैंने चुपचाप सब सहन किया। यह सब मेरे क्षत्रिय धर्म के प्रति समर्पण के कारण ही सहन हुआ॥ 11॥
 
Anagh! All these injustices were places of anger - they were intolerable, but I endured them all silently. All this was tolerated only because of my devotion to the Kshatriya Dharma.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)