श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 197: भीमसेनके वीरोचित उद्‍गार और धृष्टद्युम्नके द्वारा अपने कृत्यका समर्थन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.197.1 
संजय उवाच
अर्जुनस्य वच: श्रुत्वा नोचुस्तत्र महारथा:।
अप्रियं वा प्रियं वापि महाराज धनंजयम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- महाराज! अर्जुन की यह बात सुनकर वहाँ बैठे हुए सभी महारथी चुप हो गए। उन्होंने उससे प्रिय या अप्रिय कुछ भी नहीं कहा॥1॥
 
Sanjaya says- Maharaj! On hearing this from Arjuna, all the great warriors sitting there remained silent. They did not say anything pleasant or unpleasant to him.॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)