श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  7.196.7-8 
धृतराष्ट्र उवाच
निवर्तितेषु सैन्येषु द्रोणपुत्रेण संयुगे।
भृशं शोकाभितप्तेन पितुर्वधममृष्यता॥ ७॥
कुरूनापततो दृष्ट्वा धृष्टद्युम्नस्य रक्षणे।
को मन्त्र: पाण्डवेष्वासीत् तन्ममाचक्ष्व संजय॥ ८॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! जब समस्त सेनाएँ शोकग्रस्त तथा पिता की मृत्यु को सहन न कर सकने वाले द्रोणपुत्र अश्वत्थामा के साथ युद्धभूमि में लौट आईं, तब कौरवों को आता देख पाण्डव सेना ने धृष्टद्युम्न की रक्षा के लिए क्या विचार किया, मुझे बताओ।
 
Dhritarashtra asked - Sanjay! When all the armies returned to the battlefield along with Drona's son Ashwatthama, who was grief-stricken and unable to bear the death of his father, then on seeing the Kauravas coming, what thoughts did the Pandava army have for the protection of Dhrishtadyumna, tell me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)