पुत्रान् भ्रातॄन् पितॄन् दाराञ्जीवितं चैव वासवि:।
त्यजेत् सर्वं मम प्रेम्णा जानात्येवं हि मे गुरु:॥ ५१॥
अनुवाद
मेरे गुरुदेव का मानना था कि मेरे प्रति प्रेम के कारण अर्जुन आवश्यकता पड़ने पर अपने पिता, पुत्र, भाई, पत्नी और यहाँ तक कि अपने प्राणों का भी त्याग कर सकता है ॥ 51॥
My Gurudev believed that out of love for me, Arjuna could, if required, sacrifice his father, son, brother, wife and even his life. ॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)