श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  7.196.50 
अहो बत महत् पापं कृतं कर्म सुदारुणम्।
यद् राज्यसुखलोभेन द्रोणोऽयं साधु घातित:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
अरे! हमने बड़ा भयंकर पाप किया है कि राज्य के सुखों के मोह में आकर हमने आचार्य द्रोण को पूर्णतया मरवा डाला ॥50॥
 
Oh! We have committed a most dreadful and great sin, that being tempted by the pleasures of the kingdom we got Acharya Drona completely killed. ॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)