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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  7.196.49 
तस्याचार्यस्य वृद्धस्य द्रोहो नित्योपकारिण:।
कृत्वे ह्यनार्यैरस्माभी राज्यार्थे लुब्धबुद्धिभि:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
हमारी बुद्धि लोभ से ग्रस्त है। हम नीच लोगों ने उस बूढ़े गुरु के साथ विश्वासघात किया है जिसने सदैव राज्य की सहायता की थी।
 
Our intellect is afflicted with greed. We lowly people have betrayed the old teacher who always helped the state.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)