श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  7.196.45 
पितेव नित्यं सौहार्दात् पितेव हि च धर्मत:।
सोऽल्पकालस्य राज्यस्य कारणाद् घातितो गुरु:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
जो हमें सदैव पिता के समान प्रेम करते थे और हमारा मंगल चाहते थे, जो धार्मिक दृष्टि से भी हमारे पिता के समान थे, उन्हीं गुरुदेव को हमने इस क्षणभंगुर राज्य के लिए मरवा डाला ॥ 45॥
 
The one who always loved us like a father and wished well for us, the one who was like our father even from the religious point of view, we got that very Gurudev killed for this ephemeral kingdom. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)