श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  7.196.44 
यदा गतं वयो भूय: शिष्टमल्पतरं च न:।
तस्येदानीं विकारोऽयमधर्मोऽयं कृतो महान्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
अब हमारी आयु का अधिकांश भाग बीत चुका है और बहुत थोड़ा ही शेष बचा है। इसी कारण इस समय हमारी बुद्धि भ्रष्ट हो गई है और हमने यह महान पाप किया है ॥ 44॥
 
Now most of our lifespan has passed and very little is remaining. That is why our minds have become corrupted at this time and we have committed this great sin. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)