Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.196.43: मैं अपने गुरु के प्राणों की रक्षा के लिए बार-बार पुकारता रहा, लेकिन स्वयं शिष्य होते हुए भी धृष्टद्युम्न ने धर्म को लात मारकर अपने गुरु को मार डाला। | mahabharat अध्याय 7.196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विक्रोशमाने हि मयि भृशमाचार्यगृद्धिनि।
अपाकीर्य स्वयं धर्मं शिष्येण निहतो गुरु:॥ ४३॥
अनुवाद
मैं अपने गुरु के प्राणों की रक्षा के लिए बार-बार पुकारता रहा, लेकिन स्वयं शिष्य होते हुए भी धृष्टद्युम्न ने धर्म को लात मारकर अपने गुरु को मार डाला।
I kept on calling out again and again for protection of the life of my teacher, but in spite of being a disciple himself Dhrishtadyumna kicked the Dharma and killed his teacher.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥