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mahabharat 7.196.39-40h: पुत्रवत्सल गुरुदेव पुत्रशोक के कारण युद्ध से विमुख हो गए थे। ऐसी स्थिति में आपने सनातन धर्म की अवहेलना करके उन्हें शस्त्र से मरवा डाला। 39 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  7.196.39-40h 
स तु शोकसमाविष्टो विमुख: पुत्रवत्सल:॥ ३९॥
शाश्वतं धर्ममुत्सृज्य गुरु: शस्त्रेण घातित:।
 
 
अनुवाद
पुत्रवत्सल गुरुदेव पुत्रशोक के कारण युद्ध से विमुख हो गए थे। ऐसी स्थिति में आपने सनातन धर्म की अवहेलना करके उन्हें शस्त्र से मरवा डाला। 39 1/2॥
 
Putravatsal Gurudev had turned away from the war due to his grief over his son. In that situation, you disregarded Sanatana Dharma and got him killed with a weapon. 39 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)