श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  7.196.36-37h 
सर्वधर्मोपपन्नोऽयं स मे शिष्यश्च पाण्डव:॥ ३६॥
नायं वदति मिथ्येति प्रत्ययं कृतवांस्त्वयि।
 
 
अनुवाद
आचार्य ने यह सोचकर आप पर विश्वास किया कि पाण्डवपुत्र युधिष्ठिर सभी धर्मों के ज्ञाता और मेरे शिष्य हैं। वे कभी झूठ नहीं बोलते।
 
The Acharya believed in you thinking that Yudhishthira, the son of Pandava, is the knower of all religions and is my disciple. He never tells a lie.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)