श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  7.196.35-36h 
चिरं स्थास्यति चाकीर्तिस्त्रैलोक्ये सचराचरे॥ ३५॥
रामे वालिवधाद् यद्वदेवं द्रोणे निपातिते।
 
 
अनुवाद
अतः जैसे श्री रामचन्द्र जी ने बालि को छिपकर मारने के कारण अपकीर्ति पाई, वैसे ही झूठ बोलकर द्रोणाचार्य को मरवाने के कारण आपकी अपकीर्ति चराचर प्राणियों सहित तीनों लोकों में स्थायी रहेगी॥35 1/2॥
 
Therefore, just as Shri Ramchandra ji got infamy for secretly killing Vali, in the same way, for getting Dronacharya killed by telling a lie, your infamy will be permanent in all the three worlds along with the grazing animals. 35 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)