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mahabharat 7.196.34-35h: धर्म के ज्ञाता होते हुए भी तूने बल के लोभ से झूठ बोलकर अपने गुरु को धोखा दिया; तूने महान पाप किया है ॥34 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  7.196.34-35h 
उपचीर्णो गुरुर्मिथ्या भवता राज्यकारणात्॥ ३४॥
धर्मज्ञेन सता नाम सोऽधर्म: सुमहान् कृत:।
 
 
अनुवाद
धर्म के ज्ञाता होते हुए भी तूने बल के लोभ से झूठ बोलकर अपने गुरु को धोखा दिया; तूने महान पाप किया है ॥34 1/2॥
 
Despite being knowledgeable about Dharma, you deceived your Guru by lying due to greed for power; you have committed a great sin. ॥ 34 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)