श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन  »  श्लोक 30-32h
 
 
श्लोक  7.196.30-32h 
जातमात्रेण वीरेण येनोच्चै:श्रवसा यथा॥ ३०॥
ह्रेषता कम्पिता भूमिर्लोकाश्च सकलास्त्रय:।
तच्छ्रुत्वान्तर्हितं भूतं नाम तस्याकरोत् तदा॥ ३१॥
अश्वत्थामेति सोऽद्यैष शूरो नदति पाण्डव।
 
 
अनुवाद
पाण्डुपुत्र! जिस वीर योद्धा ने जन्म लेते ही उच्चैःश्रवा घोड़े की तरह हिनहिनाकर पृथ्वी और तीनों लोकों को हिला दिया था। उस ध्वनि को सुनकर किसी अदृश्य प्राणी ने उसका नाम 'अश्वत्थामा' रखा था, वही वीर योद्धा अश्वत्थामा सिंह के समान दहाड़ रहा है।
 
Son of Pandu! The brave warrior who, as soon as he was born, neighed like the horse Uchchaihshrava and shook the earth and the three worlds. On hearing that sound, some invisible creature named him 'Ashwatthama', is the same brave warrior Ashwatthama who is roaring like a lion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)