श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.196.25-26h 
क एष कौरवान् दीर्णानवस्थाप्य महारथ:॥ २५॥
निवर्तयति युद्धार्थं मृधे देवेश्वरो यथा।
 
 
अनुवाद
यह इन्द्र के समान महारथी कौन है जो भागते हुए कौरवों को खड़ा करके पुनः युद्ध के लिए रणभूमि में ला रहा है? ॥25 1/2॥
 
Who is this great warrior, like Lord Indra, who is making the fleeing Kauravas stand up and bring them back to the battlefield for another fight? ॥25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)