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mahabharat 7.196.24-25h: हे धनंजय! इस भयंकर एवं तीव्र गर्जना को सुनकर हमारे श्रेष्ठतम सारथी भी व्याकुल हो गए हैं और उनके रोंगटे खड़े हो गए हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  7.196.24-25h 
प्रहृष्टरोमकूपाश्च संविग्ना रथपुङ्गवा:॥ २४॥
धनंजय गुरुं श्रुत्वा तत्र नादं सुभीषणम्।
 
 
अनुवाद
हे धनंजय! इस भयंकर एवं तीव्र गर्जना को सुनकर हमारे श्रेष्ठतम सारथी भी व्याकुल हो गए हैं और उनके रोंगटे खड़े हो गए हैं।
 
O Dhananjaya! On hearing this very fierce and loud roar, even our best charioteers have become agitated and their hair has stood on end. 24 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)