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mahabharat 7.196.23-24h: मैं समझ गया कि यह भयानक ध्वनि वज्रधारी इंद्र की गर्जना है। ऐसा प्रतीत होता है कि द्रोणाचार्य के मारे जाने के बाद स्वयं इंद्र कौरवों की सहायता के लिए आ रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  7.196.23-24h 
मन्ये वज्रधरस्यैष निनादो भैरवस्वन:॥ २३॥
द्रोणे हते कौरवार्थं व्यक्तमभ्येति वासव:।
 
 
अनुवाद
मैं समझ गया कि यह भयानक ध्वनि वज्रधारी इंद्र की गर्जना है। ऐसा प्रतीत होता है कि द्रोणाचार्य के मारे जाने के बाद स्वयं इंद्र कौरवों की सहायता के लिए आ रहे हैं।
 
I understand that this terrifying sound is the roar of Indra wielding the thunderbolt. It seems clear that Indra himself is coming to help the Kauravas after Dronacharya is killed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)