श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  7.196.22-23h 
य एष तुमुल: शब्द: श्रूयते लोमहर्षण:॥ २२॥
सेन्द्रानप्येष लोकांस्त्रीन् ग्रसेदिति मतिर्मम।
 
 
अनुवाद
यह जो भयंकर, रोमांचकारी ध्वनि सुनाई दे रही है, वह मुझे इन्द्र सहित तीनों लोकों को ग्रसित करती हुई प्रतीत हो रही है।
 
This terrifying, thrilling sound that is being heard, seems to me to be engulfing the three worlds including Indra. 22 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)