श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  7.196.21-22h 
एते शब्दा भृशं तीव्रा: प्रवृत्ता: कुरुसागरे॥ २१॥
मुहुर्मुहुरुदीर्यन्ते कम्पयन्त्यपि मामकान्।
 
 
अनुवाद
कौरव सेना का समुद्र में यह कोलाहल बड़े जोर से शुरू हो गया है और बार-बार बढ़ रहा है, जिससे मेरे सैनिक काँप रहे हैं ॥21 1/2॥
 
This uproar in the sea of ​​the Kaurava army has begun with great force and is increasing again and again, which makes my soldiers tremble. ॥ 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)