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mahabharat 7.196.18-19h: बहुत से सैनिक अपने पुत्रों, पिताओं, मित्रों और भाइयों को बुरी तरह घायल करके उन्हें रथों पर लाद रहे थे और उनके कवच उतारकर उनके घावों को जल से भिगो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  7.196.18-19h 
पुत्रान् पितॄन् सखीन् भ्रातॄन् समारोप्य दृढक्षतान्॥ १८॥
जलेन क्लेदयन्त्यन्ये विमुच्य कवचान्यपि।
 
 
अनुवाद
बहुत से सैनिक अपने पुत्रों, पिताओं, मित्रों और भाइयों को बुरी तरह घायल करके उन्हें रथों पर लाद रहे थे और उनके कवच उतारकर उनके घावों को जल से भिगो रहे थे।
 
Many soldiers, having badly wounded sons, fathers, friends and brothers, put them on chariots and after removing their armour were soaking their wounds with water. 18 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)