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mahabharat 7.195.8-9h: लेकिन धर्म के प्रति समर्पित होने के बावजूद, सभी सैनिकों के सामने उसके बाल पकड़े जाने का अपमान मेरे दिल को चुभता है।   |   mahabharat अध्याय 7.195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्‍गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्‍गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  7.195.8-9h 
यत् तु धर्मप्रवृत्त: सन् केशग्रहणमाप्तवान्॥ ८॥
पश्यतां सर्वसैन्यानां तन्मे मर्माणि कृन्तति।
 
 
अनुवाद
लेकिन धर्म के प्रति समर्पित होने के बावजूद, सभी सैनिकों के सामने उसके बाल पकड़े जाने का अपमान मेरे दिल को चुभता है।
 
But despite being devoted to Dharma, the insult of his hair being caught in front of all the soldiers pierces my heart.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)